अधिकार मेरा ।
आप सभी को मेरा नमस्कार एक और बार, पिछले लेख में मैंने रेसेशन के बारे में बात कि थीं और आज मैं बात करना चाहूँगा हमारे उस अधिकार के बारे मे जो हमें भारत के संविधान ने दिया है 'मत' 'vote'।
हम सबकी आदत है राजनीति के बारे मे चर्चा और विश्लेषण करने की, सदैव अपनी चिंता को हम सरकार के माथे मढ देते हैं । क्या हमने अपने मत के अधिकार का प्रयोग किया था चुनाव के अवसर पर, हमने खुद से यह सवाल पूछना होगा । हमें क्यों यह अधिकार मिला है और इसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव होता हैं, कुछ सरल भाषा मे आपको समझाने कीं कोशिश करता हूँ।
इस विश्लेषण को चार हिस्सो मे बाँटने कि कोशिश करता हूँ, जिसमें बिना कोई दिमागी कुश्ती लड़े सरलता से बात समझ आ जाए । चार हिस्से है - स्त्री, पुरुष, वृद्ध और हमारे नौजवान ।
स्त्री : आपके किचन से ही शुरुआत होती है, गैस, मिट्टी का तेल या दूल॔भ पदार्थ, इनमे वृद्धि अथवा कटौती यह असर राजनीति से ही होता हैं, गृहस्थी चलाने के लिए समग्री, दूध, बिजली, राशन और आवश्यक वस्तुओं के दाम मे उतार-चढ़ाव भी राजनीति कि देन होती हैं इसे राजनीतिक भाषा या सामाजिक भाषा मे अथ॔शासत्र कहा जाता हैं । महिलाओं कि सुरक्षा, महिलाओं के अधिकार, एंपावरमेंट, इसी लिए अपने मत के अधिकार को समझते हुए उसका सही उपयोग करें ।
पुरुष : क्षमा चाहूँगा कमजोर कड़ी को छेड़ रहा हूँ, नौकरी, बिसनेस और रोजगार मे मंदी या उऩती। होम लोन ब्याज दर, मेहंगाई दर, tax, पेट्रोल और डीजल के दाम मे बढ़ोतरी, बिजली के बढ़ते दाम, मल्टी टैक्स सिस्टम और कई महत्वपूर्ण बातें जिससे आपकी दैनिक जीवन पर अच्छा और बुरा प्रभाव करतीं हैं ।
वृद्ध : आजकल जो समाचार पढ़ने को मिलता हैं वो हमें विवश करता हैं यह सोंचने पर कीं हम किस समाज में जी रहें है, वयोवृद्ध गृह जहाँ हमारे अपने बुजुर्गों को कई लोग साथ नहीं रखते और वहाँ छोड़ आते हैं। बुजुर्गों कि रक्षा आज के समाज में बड़ा सवाल हैं, उनके अधिकार, समाज में उनकी उपस्थिति और उपलब्धि। इन महत्वपूर्ण विषयों में राजनीति का योगदान आवश्यक हैं, और आपका योगदान हमारी पीढ़ी को मत के अधिकार के बारे में प्रोत्साहित करने मे और उसकी महत्वता समझाने में बहुमूल्य हैं ।
नौजवान : आपको जानकर अचरज होगा के आप जो सिलेबस पढ़ते हैं उसका गठन सरकार चलाने वाले राजनीतिक ही करते हैं । विश्व विद्यालयों, कोटा एडमिशन, ट्रांसपोर्ट फेसिलीटी, नौकरीयां, ईजिनियर और डोकटर कि सीटों का निर्णय, नई इंडस्ट्रीज का निर्माण या अनुमति, आपके भविष्य कि जिम्मेदारी, यह सारी बातें और इनका निर्णय अपनी चुनी सरकार ही करतीं हैं।
देश कि सुरक्षा, आयात और नीय्रात नीति, ऐसी और भी कई बातें हैं जिनका हमारे जीवन पर असर होता हैं, नौकरीयो में जाती के आधार पर कोटा, और लंबी लिस्ट हैं ।
हमे अपनी सूझबूझ, अनुभव के अनुसार कार्य और जिम्मेदारी मिलती हैं, बच्चों को भी परीक्षा के पश्चात ही अवसर प्राप्त होते हैं, निकम़े इंसान को जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं दिया जाता वैसे ही हमें यह भी विचार करना होगा कि हमारा शासक किस तरह का हो।हमें पूरी जिम्मेदारी से अपने मत के अधिकार का प्रयोग करना हैं और निश्चय करना हैं, समाज में जागरूकता कि मशाल को संपूर्ण रूप से प्रज्वलित करे और सभी को प्रोत्साहित करे कि वो अपने अधिकार का उपयोग करे एक शक्तिशाली, प्रगतिशील और सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए ।
हमारी पहल तभी पूरी होगी जब हम निश्चय करेंगे के मैं ग्यारह लोगों को प्रोत्साहित करूँगा और अपेक्षा करूँगा के हर एक वयकति ग्यारह लोगों को प्रोत्साहित करे कि वो अपने 'मत' 'वोट' के अधिकार का प्रयोग एवं पालन करे हमारे देश के निर्माण के लिए ।
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